गडचिरोली जिल्ह्याची निर्मिती २६ आगस्ट १९८२ रोजी चंद्रपूर जिल्ह्याचे विभाजन करून झाली. संपूर्ण गडचिरोली जिल्हा हा पूर्वी चंद्रपूर जिल्ह्यामध्ये समाविष्ट होता व मुख्यतः गडचिरोली, सिरोंचा ही ठिकाणे चंद्रपूर जिल्ह्यामध्ये तहसील म्हणून कार्यरत होती. गडचिरोली जिल्ह्याचे एकुण क्षेत्रफळ १४४१२ चौ.कि.मी.आहे.
चंद्रपूर
व ब्रम्हपुरी मधील जमिनदारी व मालमत्तेचे हस्तांतरण करून
गडचिरोली तहसील म्हणून १९०५ पासून अस्तित्वात होती. ब्रम्हपुरी ऐवजी गडचिरोली
जिल्ह्याची निर्मिती २६ आगस्ट १९८२ रोजी चंद्रपूर जिल्ह्याचे विभाजन करून करण्यात
आली आहे. गडचिरोली जिल्हा हा महाराष्ट्र राज्याच्या विदर्भ या प्रदेशात मोडतो. फार
प्राचीन काळी ह्या प्रदेशावर राष्ट्र्कुट यांचे राज्य होते. त्यानंतर चालुक्य, देवगीरीचे यादव यांचे साम्राज्य होते. यानंतर
गडचिरोलीच्या गोंड राजांनी राज्य केले. तेराव्या शतकात, खन्डक्या बल्लाळ शाह यांनी चंद्रपूरची स्थापना
केली. त्यांनी आपली राजधानी सिरपूर येथून चंद्रपूर येथे हलविली. याचकाळात चंद्रपूर
प्रदेश हा मराठ्याच्या सत्तेखाली आला. १८५३ मध्ये, बेरार हा चंद्रपूर (पूर्वीचे चांदा ) प्रदेशाचा
भाग ब्रिटीश ईस्ट इंडिया कंपनी च्या ताब्यात आला. १८५४ मध्ये चंद्रपूर हा बेरार या
प्रदेशाचा स्वतंत्र जिल्हा म्हणून अस्तित्वात आला. ब्रिटीशांनी १९०५ मध्ये
चंद्रपूर व ब्रम्ह्पुरीची जमिनदारी व मालमत्ता हस्तांतरण करून गडचिरोली तहसीलची
निर्मिती केली. राज्याची पुनर्ररचना होण्यापुर्वी हा भाग १९५६ पर्यंत केंद्रीय
अधिपत्याखाली होता. त्यानंतर राज्यपुनर्रचनेनुसार चंद्रपूर बॉम्बे स्टेट मध्ये
समाविष्ट करण्यात आले. १९६० मध्ये केंद्र शासनाने महाराष्ट्र राज्याची स्थापना
करून त्यामध्ये चंद्रपूर हे जिल्हा म्हणून समाविष्ट करण्यात आले. १९८२ मध्ये
चंद्रपूर जिल्ह्याचे विभाजन करून ब्रम्हपुरी ऐवजी स्वतंत्र गडचिरोली जिल्हा
अस्तित्वात आला.
गडचिरोली
जिल्हा हा महाराष्ट्र राज्याच्या उत्तर-पूर्व दिशेला
वसलेला असून आंध्रप्रदेश व छत्तीसगड राज्याच्या सीमा लागून आहेत. गडचिरोली जिल्हा
हा पूर्णपणे नक्सल प्रभावित जिल्हा म्हणून ओळखला जातो. गडचिरोली जिल्हा जवळपास ७६
% जंगलाने व्यापलेला असल्याने घनदाट जंगलात नक्सल समर्थित लोक आश्रय घेतात.
जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या १०७२९४२ असून पुरुष व स्त्रिया
यांची लोकसंख्या अनुक्रमे ५४१३२८, ५३१६१४
याप्रमाणे आहे ( २०११ च्या जनगणने नुसार). जिल्ह्यात अनुसूचित जाती व जमाती ची
लोकसंख्या अनुक्रमे १२०७४५ व ४१५३०६ ऐवढी आहे. जिल्ह्याची एकूण साक्षरता ६६.०३
टक्के आहे. जिल्ह्यामध्ये अनुसूचित जाती व जमातीची लोकसंख्येची टक्केवारी ११.२५ %
व ३८.१७ % अनुक्रमे आहे.
गडचिरोली
जिल्हा हा मुख्यत्वे महाराष्ट्र राज्यात आदिवासी, मागासलेला व घनदाट जंगलाने व्याप्त जिल्हा
म्हणून ओळखला जातो. हा जिल्हा अतिदुर्गम, डोंगर
द-याने व्याप्त व अविकसित असून जास्तीत जास्त क्षेत्र जंगलाने वेढलेला आहे.
जिल्ह्याच्या एकूण जमिनीच्या क्षेत्रापैकी ७५.९६ टक्के भाग जंगलाने व्याप्त आहे.
हा जिल्हा बांबुचे झाड व तेंदू ची पाने करीता प्रसिध्द आहे. भात हे जिल्ह्याचे
मुख्य पिक आहे. याव्यतिरिक्त तूर, गहू, ज्वारी, सोयाबीन, जवस इत्यादी कृषी उत्पादने घेतली जातात. जिल्ह्यातील
लोकांचा मुख्य व्यवसाय शेती आहे.
जिल्ह्यात चामोर्शी तालुक्यामध्ये आष्टी येथे पेपर मिल चा
कारखाना असून इतर कोणतेही मोठे उद्योगधंदे नाहित. यामुळे, जिल्हा हा आर्थिकदृष्ट्या मागासलेला आहे.
जिल्ह्यात भाताचे उत्पादन जास्त होत असल्याने भात गिरणी ची संख्या जास्त आहे.
जिल्ह्यात कोसाचे उत्पादन होत असून कोसा उत्पादन केंद्र आरमोरी येथे आहे.
जिल्ह्यात फक्त १८.५ कि.मी. लांबीचा रेल्वे मार्ग असून देसाईगंज येथे रेल्वेची
सुविधा आहे.
गडचिरोली जिल्ह्यामध्ये मुख्यतः गोंडी, माडिया, मराठी, हिंदी, तेलगु, बंगाली, छत्तीसगडी इत्यादी भाषा बोलल्या जातात.
गडचिरोली जिल्ह्यामध्ये शासनाने प्रशासकीयदृष्ट्या एकूण
सहा उपविभाग (गडचिरोली, वडसा, अहेरी, चामोर्शी, एटापल्ली, कुरखेडा) निर्माण केले असुन प्रत्येक उपविभागात
दोन तालुके सामाविष्ट करण्यात आलेले आहेत. जिल्ह्यात एकूण १२ तालुके आहेत.
जिल्ह्यात ४५७ ग्रामपंचायती असून १६८८ राजस्व गावे अस्तित्वात आहेत. जिल्ह्यामध्ये
तीन विधानसभा व एक लोकसभा क्षेत्र (चंद्रपूर जिल्ह्याचा काही भाग मिळून) असून १२
पंचायत समीती आहेत. जिल्ह्यात १० नगर पंचायती असून गडचिरोली व देसाईगंज या शहरात
नगरपालिका आहेत.
गोदावरी
नदी पश्चिमेकडून पूर्वे कडे वाहत असून तिचे पात्र
जिल्ह्याच्या सीमेला लागून असून दक्षिण भागाला जिल्हा वसलेला आहे. गोदावरी नदीच्या
उपनद्या जसे प्राणहिता (वैनगंगा व वर्धा या उपनद्या मिळून) व इंद्रावती ह्या मुख्य
नद्या जिल्ह्याच्या सीमाभागात वाहतात.
जिल्ह्याचे पूर्वेत्तर भागात, धानोरा, एटापल्ली, अहेरी व सिरोंचा तालुके असून घनदाट जंगलाने
व्याप्त आहे. जिल्ह्याच्या भामरागड, टिपागड, पलसगड व सुरजागड भागात उंच टेकड्या आहेत.
|
गडचिरोली जिल्हा एका दृष्टीक्षेपात |
|
जिल्हा मुख्यालय |
गडचिरोली |
|
जिल्ह्याचे भौगोलिक
क्षेत्र |
१४४१२ चौ.की.मी. |
|
जिल्ह्याचे भौगोलिक
ठिकाण |
१८.४३ ते २१.५० उत्तर
अक्षांश |
|
|
७९.४५ ते ८०.५३ पूर्व
रेखांश |
|
|
समुद्रसपाटी पासून उंची
- २१७ मी.(७१५ फिट ) |
|
जिल्ह्याचे तापमान
(१९९८)) |
सर्वात कमी ११.३ डी.से.
सर्वात जास्त ४७.७ डी.से. |
|
सरासरी पर्जन्यमान
(२०११) |
८४०.७ मीली मी. |
|
जिल्ह्यातील एकूण उपविभाग
(६) |
१.गडचिरोली २. देसाईगंज
(वडसा) ३. अहेरी |
|
जिल्ह्यातील एकूण
तालुके |
१२ |
|
जिल्ह्यातील एकूण गावे |
१६७९ |
|
जिल्ह्यातील एकूण शहरे |
२ ( गडचिरोली, देसाईगंज) |
|
जिल्ह्यातील एकूण
ग्रामपंचायती |
४५७ |
|
एकूण नगरपालिका (२) |
१. गडचिरोली २.
देसाईगंज |
|
एकूण नगर पंचायत (10) |
आरमोरी, कुरखेडा, कोरची, धानोरा, चामोर्शी, मुलचेरा, अहेरी, एटापल्ली, सिरोंचा, भामरागड |
|
लोकसभा निर्वाचन
क्षेत्र (१) |
चिमूर-गडचिरोली |
|
विधानसभा निर्वांचन
क्षेत्र (३) |
गडचिरोली, आरमोरी, अहेरी |
|
एकूण पोलिस स्टेशन्स |
२९ |
|
पोलिस आऊट पोस्ट |
३१ |
|
लोकसंख्या (२०११) |
|
|
एकूण |
१०७२९४२ |
|
पुरुष |
५४१३२८ |
|
स्त्रिया |
५३१६१४ |
|
लोकसंख्या घनता |
६७ प्रती की.मी. (C-2001) |
|
स्त्रिया / पुरुष प्रमाण |
982 |
|
साक्षरता (सेन्सस
२०११नुसार) |
|
|
एकूण |
६६.०३ % |
|
पुरुष |
५५.७८ % |
|
स्त्रिया |
४४.२२ % |
|
आरोग्य |
|
|
जिल्हा रुग्णालय |
१ |
|
एकूण ग्रामीण रुग्णालये |
१३ |
|
एकूण प्राथमिक आरोग्य केंद्र |
४५ |
|
प्राथमिक आरोग्य पथक |
३६ |
|
एकूण उत्पादित
क्षेत्र(२००२-०३) |
१९०२८२ हे. |
|
जिल्ह्यातील मुख्य पिक |
धान |
|
जिल्ह्यातील एकूण
सहकारी संस्था(२०१०-११) |
९४० |
|
शैक्षणिक माहिती
(२०१०-११) |
|
|
एकूण प्राथमिक शाळा |
१६३२ |
|
एकूण विद्यार्थी |
११०४०० |
|
एकूण शिक्षक |
४८७८ |
|
एकूण माध्यमिक शाळा |
३२८ |
|
विद्यार्थी |
१०९३०० |
|
शिक्षक |
३३९७ |
|
एकूण वरिष्ठ महाविद्यालये |
५८ |
|
विद्यार्थी |
११६६८ |
|
तांत्रिक शिक्षण
(२०१०-११) |
|
|
शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था |
१२ |
|
खाजगी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था |
४ |
|
प्रवेश क्षमता |
३१२८ |
|
शासकीय तंत्रनिकेन संस्था |
१ |
|
तंत्रनिकेतन प्रवेश क्षमता |
३०० |
|
व्यावसायिक महाविद्यालये |
१९ |
|
प्रवेश क्षमता |
२४४८ |
|
रस्ते व दळणवळण (२००८-०९)
(जि.सां.का. सौजन्याने) |
|
|
रेल्वे रस्ता |
१८.४६ कि.मी. |
|
प्रस्तावित राष्ट्रीय महामार्ग |
५९ कि.मी. |
|
मुख्य राज्य महामार्ग |
३६७ कि.मी. |
|
राज्य रस्ते व मार्ग |
१७७२ कि.मी. |
|
मुख्य जिल्हा मार्ग |
१९४१ कि.मी. |
|
इतर जिल्हा मार्ग |
१८८० कि.मी. |
|
ग्रामीण रस्ते |
४९१६ कि.मी. |
|
दारिद्र्य रेषेखालील
कुटुंबांची संख्या (२००२-०७) |
|
|
एकूण कुटुंब संख्या |
११२५३८ |
|
अनुसूचित जाती कुटुंब संख्या |
१८८८८ |
|
अनुसूचित जमाती कुटुंब संख्या |
४२५३७ |
|
विद्युत पुरवठा असलेली
गावे, |
१४४६ |
|
एकूण आदिवासी आश्रम
शाळा (२००८-०९) |
१०१ |
|
प्रवेश क्षमता |
३५५८२ |
|
एकूण स्वस्त धान्य दुकाने |
१०६३ |
|
जिल्ह्यातील ऐतिहासिक व
धार्मिक स्थळे |
मार्कंडा, चपराला, आल्लापल्ली, वैरागड |
|
एकूण जंगलव्याप्त क्षेत्र |
११३३००९ हे., ७५.९६ % |
|
जिल्ह्यातील पशुधन
(२००३) |
|
|
एकूण पशुधन |
१०७२१२५ |
|
पशुवैद्यकीय चिकित्सालय |
९० |
|
पशुवैद्यकीय मदत केंद्र |
४४ |
|
फिरते पशुवैद्यकीय रुग्णालय |
७ |
|
जिल्हा पशुवैद्यकीय रुग्णालय |
१ |
|
लघु पशुवैद्यकीय रुग्णालय |
६ |
|
प्रसार माध्यमे |
|
|
दैनिक वर्तमानपत्रे |
४ |
|
आठवडी वर्तमानपत्रे |
१४ |
गडचिरोली जिल्ह्याचे मुख्यालय गडचिरोली येथे असून जिल्हा महाराष्ट्र राज्याच्या नागपुर विभागात
मोडतो. हा जिल्हा विदर्भ या भागात येतो. जिल्हाधिकारी कार्यालय हे गडचिरोली
शहरापासून ४ कि.मी. अंतरावर चंद्रपूर मार्गावर वसलेले आहे. जिल्ह्याचे एकूण
भौगोलिक क्षेत्र १४४१२ चौ.कि.मी. आहे.
गडचिरोली जिल्हा हा प्रशासकीय
दृष्ट्या एकूण सहा उपविभागात विभागलेला आहे. गडचिरोली,
देसाईगंज (वडसा), अहेरी, कुरखेडा, चामोर्शी, एटापल्ली हे जिल्ह्याचे
सहा उपविभाग असून प्रत्येक उपविभागात दोन तालुके समाविष्ट केलेले आहेत.
जिल्ह्यातील उपविभाग व
त्याची नावे
|
अ.क्र. |
उपविभागाचे नाव |
समाविष्ट तालुक्याची नावे |
|
१ |
गडचिरोली |
गडचिरोली, धानोरा |
|
२ |
चामोर्शी |
चामोर्शी, मुलचेरा |
|
३ |
अहेरी |
अहेरी, सिरोंचा |
|
४ |
एटापल्ली |
एटापल्ली, भामरागड |
|
५ |
देसाईगंज (वडसा) |
देसाईगंज, आरमोरी |
|
६ |
कुरखेडा |
कुरखेडा, कोरची |
जिल्ह्यातील उपविभाग, तालुके व तालुकानिहाय एकूण समाविष्ट गावे
|
अ. क्र. |
उपविभागाचे नाव |
विभागातील तालुके |
तालुकानिहाय एकूण गावे |
एकूण समाविष्ट मंडळ |
एकूण समाविष्ट साजे |
|
१ |
गडचिरोली |
१. गडचिरोली |
१२८ |
४ |
२४ |
|
|
|
२. धानोरा |
२२८ |
४ |
२३ |
|
२ |
चामोर्शी |
१. चामोर्शी |
२०४ |
५ |
३३ |
|
|
|
२. मुलचेरा |
६८ |
१ |
८ |
|
३ |
देसाईगंज (वडसा) |
१. देसाईगंज |
३९ |
२ |
१३ |
|
|
|
२. आरमोरी |
१०३ |
४ |
२० |
|
४ |
कुरखेडा |
१.कुरखेडा |
१२८ |
३ |
१८ |
|
|
|
२. कोरची |
१३३ |
३ |
१७ |
|
५ |
अहेरी |
१. अहेरी |
१८४ |
४ |
२२ |
|
|
|
२. सिरोंचा |
१४८ |
४ |
२३ |
|
६ |
एटापल्ली |
१. एटापल्ली |
१९७ |
४ |
२२ |
|
|
|
२. भामरागड |
१२८ |
२ |
१० |
|
|
एकूण |
एकूण तालुके - १२ |
१६८८ |
४० |
२३३ |
जिल्ह्यात एकूण १६८८ राजस्व गावे असून ४५७ ग्राम पंचायती, १२ पंचायत समीती व एक
जिल्हा परीषद आहे. जिल्ह्यात १० नगर पंचायती (आरमोरी,
कुरखेडा, कोरची, धानोरा, चामोर्शी, मुलचेरा, अहेरी, एटापल्ली, सिरोंचा, भामरागड) असून दोन
नगरपालिका गडचिरोली व देसाईगंज (वडसा) येथे आहेत.
|
गडचिरोली जिल्ह्याचे ठिकाणाबाबत माहिती |
गडचिरोली जिल्हा हा महाराष्ट्र राज्याच्या
उत्तर-पूर्व दिशेला वसलेला आहे. हा जिल्हा १८.४३'
ते २१.५०' उत्तर अक्षांश आणि ७९.४५' ते ८०.५३' पूर्व रेखांश या दरम्यान
मोडतो. यामुळे या जिल्ह्याचा भाग डेक्कन प्लेट्यू क्षेत्रात येतो. गडचिरोली जिल्ह्याच्या
पूर्व सीमेला दुर्ग, राजनांदगाव हे छत्तीसगड राज्यातील जिल्हे,
पश्चिमेला चंद्रपूर जिल्हा, उत्तरेस भंडारा जिल्हा व
दक्षिणेस अंध्राप्रदेश मधील अदिलाबाद, करीमनगर जिल्हे व छत्तीसगड
मधील जगदलपूर जिल्हा आहेत.
जिल्ह्याचे मुख्यालय गडचिरोली येथे
वसलेले असून हा जिल्हा नागपूरपासून १८० कि.मी. एवढया अंतरावर आहे. गडचिरोली जिल्हा
चंद्रपूर पासून ८० कि.मी. अंतरावर आहे. सदर जिल्हा वैनगंगा, गोदावरी व इंद्रावती या
मोठ्या नद्यांनी अनुक्रमे पश्चिम, दक्षिण व पूर्व दिशेने वेढलेला आहे.
गडचिरोली जिल्ह्याचे २०११ च्या जनगणने
नुसार डेमोग्राफिक वैशिष्टे खालील प्रमाणे आहे. ;
|
एकूण घर धारकांची संख्या |
2,50,435 |
|
एकूण जिल्ह्याची
लोकसंख्या |
10,72,942 |
|
एकूण पुरुष लोकसंख्या |
5,41,328 |
|
एकूण स्त्री लोकसंख्या |
5,31,614 |
|
स्त्री पुरुष प्रमाण |
982 |
|
शहरी लोकसंख्या |
1,18,033 |
|
ग्रामीण लोकसंख्या |
9,54,909 |
|
शहरी लोकसंख्येचे प्रमाण
% मध्ये |
11.0 % |
|
ग्रामीण लोकसंख्येचे
प्रमाण % मध्ये |
89.0 % |
|
साक्षरता प्रमाण |
66.03 |
|
पुरुष साक्षरतेचे प्रमाण |
72.98 |
|
स्त्री साक्षरतेचे
प्रमाण |
58.92 |
|
निरक्षरतेचे प्रमाण |
33.97 |
|
पुरुष निरक्षरतेचे
प्रमाण |
27.01 |
|
स्त्री निरक्षरतेचे
प्रमाण |
41.07 |
|
एकूण अनुसूचित जातीची
लोकसंख्या |
1,20,745 |
|
एकूण अनुसूचित जाती
पुरुषांची लोकसंख्या |
61,041 |
|
एकूण अनुसूचित जाती
स्त्रियांची लोकसंख्या |
59,704 |
|
अनुसूचित जाती लोकसंख्या
% मध्ये |
11.25 % |
|
एकूण अनुसूचित जमातीची
लोकसंख्या |
4,15,306 |
|
एकूण अनुसूचित जमाती
पुरुषांची लोकसंख्या |
2,07,377 |
|
एकूण अनुसूचित जमाती
स्त्री लोकसंख्या |
2,07,919 |
|
अनुसूचित जमाती
लोकसंख्या % मध्ये |
38.17 % |
|
एकूण दरिद्री रेषेखालील
कुटुंबांची संख्या |
1,12,738 (BPL Survey 2002-07) |
|
एकूण दरिद्री रेषेखालील अनुसूचित
जातीतील कुटुंबांची संख्या |
18,888 |
|
एकूण दरिद्री रेषेखालील
अनुसूचित जमातीतील कुटुंबांची संख्या |
42,737 |
|
दरिद्री रेषेखालील एकूण
कामकरी कुटुंबांची संख्या |
116076 (C1998) |
- Source-Census 2011
अनुसूचित जाती व जमातीतील व दरिद्री
रेषेखालील लोक हे मुख्यता जिल्ह्यात उदभवनाऱ्या नैसर्गिक आपत्ती जसे पुर, रोगराई मुळे झळ पोहचत
असते. त्यांच्यात सुधारणा व उन्नती होण्याकरिता विशेष प्रकारचे कार्यक्रम
राबविण्याची गरज आहे.
|
गडचिरोली जिल्ह्यामधील लोकसंस्कृती |
जिल्ह्याची एकूण १०,७२,९४२ लोकसंख्या एवढी असून
पुरुष व स्त्रिया यांची लोकसंख्या अनुक्रमे ५,४१,३२८ व ५,३१,६१४ एवढी आहे (c-2011). जिल्ह्यात चामोर्शी तालुक्यात सर्वात जास्त लोकसंख्येची घनता असून
तालुक्याची एकूण लोकसंख्या १,७९,१२० एवढी आहे.
जिल्ह्यात आदिवासी जमातीची लोकसंख्या
४,१५,३०६ एवढी असून त्यांचे
प्रमाण जिल्ह्यात जास्त आहे. त्यांची टक्केवारी ३८.१७ % एवढी आहे. अनुसूचित जातीची
लोकसंख्या १,२०,७४५ एवढी असून एकूण टक्केवारी ११.२५ % आहे. जिल्ह्यात एकूण
लोकसंख्येपैकी ३८.१७ टक्के लोकसंख्या ही अनुसूचित जमातीची असल्याने हा जिल्हा
आदिवासी जिल्हा म्हणून महाराष्ट्र राज्यात ओळखल्या जातो. अनुसूचित जमातीमध्ये
मुख्यत्वे गोंड, कोलाम, माडिया, परधान इत्यादी जमातीचे लोक वास्तव्यास आहेत. त्यांची बोलीभाषा
"गोंडी, माडिया" ह्या आहेत.
जिल्ह्यातील आदिवासीची विशिष्ट अशी
त्यांची संस्कृती आहे. येथील आदिवासी लोकांचे "पेरसा पेन" हे दैवत आहे.
ही लोक शुभ कार्य प्रसंगी किवा पिकांचे उत्पादन झाल्यावर "रेला" नावाचे
नृत्य करून आनंद व्यक्त करतात. " ढोल " हे सुध्दा त्यांचे आवडीचे नृत्य
आहे. होळी, दसरा व दिवाळी हे त्यांचे मुख्य सण आहेत. आदिवासी जमात ही मुख्यता
जिल्ह्याच्या घनदाट जंगलात वास्तव्य करून आहेत.
जिल्ह्यातील इतर जातीतील लोक त्यांचे
महात्च्वाचे गणपती, दसरा, दिवाळी, होळी इत्यादी सण साजरे करतात. जिल्ह्याच्या काही भागात झाडीपट्टीतील
प्रसिध्द "नाटक, तमाशा" इत्यादी मनोरंजनाच्या कार्यक्रमाचे गणपती, दसरा, होळी या सणाचे वेळी तसेच
शंकरपटाच्या निमित्ताने आयोजन करतात.
|
गडचिरोली जिल्ह्यातील बोलीभाषा |
खालील दिलेला तक्ता
जिल्ह्यामध्ये कोणत्या भागात कोणती भाषा बोलली जाते याबाबत माहिती दर्शविते.
आदिवासी जमातिची प्रामुख्याने "गोंडी,
माडिया" या मातृभाषा
आहेत व त्यांचेमध्ये वरील भाषेतच बोलल्या जाते. जिल्ह्यातील इतर लोक मराठी, हिंदी, तेलगु, छत्तीसगडी, बंगाली व इतर भाषेचा वापर
बोलण्यासाठी करतात.
जिल्ह्याच्या सिमा भागास छात्तीगड, आंध्रप्रदेश इत्यादी
राज्ये असल्याने तेथील भाषेचा प्रभाव या भागात दिसून येतो व त्या राज्यातील भाषा
सुद्धा येथे बोलल्या जातात.
जिल्ह्यात खालीलप्रमाणे भाषा बोलल्या जातात.
|
अ.क्र. |
तालुक्याचे नाव |
या भागात भाषेचा वापर |
|
|
१ |
गडचिरोली |
मराठी, हिंदी, गोंडी, बंगाली, तेलगु |
|
|
२ |
आरमोरी |
मराठी, बंगाली, गोंडी |
|
|
३ |
वडसा |
मराठी, हिंदी, बंगाली |
|
|
४ |
कुरखेडा |
मराठी, गोंडी, धामी, छत्तीसगडी |
|
|
५ |
कोरची |
मराठी, गोंडी, धामी, छत्तीसगडी |
|
|
६ |
धानोरा |
मराठी, गोंडी, धामी, छत्तीसगडी, बंगाली, माडिया |
|
|
७ |
चामोर्शी |
मराठी, बंगाली, कन्नड, गोंडी |
|
|
८ |
मुलचेरा |
मराठी, बंगाली, गोंडी |
|
|
९ |
अहेरी |
मराठी, तेलगु, गोंडी |
|
|
१० |
एटापल्ली |
मराठी, गोंडी, माडिया |
|
|
११ |
सिरोंचा |
मराठी, तेलगु, गोंडी |
|
|
१२ |
भामरागड |
मराठी, माडिया |
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गडचिरोली जिल्ह्याचे हवामान |
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गडचिरोली जिल्ह्याचे हवामान मोसमानुसार बदलत असते.
उन्हाळ्यात जिल्ह्यामध्ये खुपच उष्णता जाणवते तर हिवाळ्यात खुपच थंडी असते.
जिल्ह्याची सरासरी आद्रता ६२ टक्के आहे.
जिल्ह्यामध्ये आतापर्यंत २० मे १९९२ रोजी ला सर्वात जास्त ४६.३
डी.से. एवढे व ५ जानेवारी १९९२ रोजी सर्वात कमी ५.० डी.से. एवढे तापमान नोंदले
गेलेले आहे.
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गडचिरोली जिल्ह्यातील पर्जन्यमान |
गडचिरोली जिल्ह्यात मुख्यतः दक्षिण- पश्चिम मान्सून वाऱ्यामुळे जून, जुलै, ऑगस्ट व सप्टेंबर या
महिन्यात पाऊस पडतो. जिल्ह्यात नेहमी जुलै व ऑगस्ट या महिन्यात भरपूर प्रमाणात
पाऊस पडून नदी नाल्यांना पुर येतो.
गडचिरोली जिल्हा
मुख्यालयाला कसे पोहचाल ?
गडचिरोली शहर हे विदर्भामधील नागपूर
व चंद्रपूर शहरापासून अनुक्रमे १८० कि.मी. व ८० कि.मी. अंतरावर वसलेले आहे. गडचिरोली
जिल्हा रस्ते मार्गाने सीमा बाजूला असलेले भंडारा,
चंद्रपूर, नागपूर जिल्ह्याशी
चांगल्याप्रकारे जोडले गेले आहे. नागपूर येथून बस द्वारे रस्ते मार्गाने गडचिरोली
येथे पोहचण्याकरिता जवळपास अनुक्रमे चार तास लागतात तर चंद्रपूर वरून दोन तास.
नागपूर व चंद्रपूर येथे जाण्याकरिता गडचिरोली वरून भरपूर प्रमाणात राज्य परिवहन
महामंडळाच्या बसेस व खाजगी वाहण व्यवस्था उपलब्ध आहे.
गडचिरोली जिल्ह्यात एकच १८.४८
कि.मी. चा रेल्वे मार्ग आहे. गडचिरोली शहर हे रेल्वेने जोडलेले नसून जिल्ह्यातील
देसाईगंज या शहरात रेल्वे स्टेशन आहे.
गडचिरोली जिल्ह्यातील
परिवहन संबंधात खालील प्रमाणे माहिती उपलब्ध आहे -
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जिल्ह्या प्रस्तावित
राष्ट्रीय महामार्ग |
१ |
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जिल्ह्या प्रस्तावित
राष्ट्रीय महामार्ग ची लांबी कि.मी. मध्ये |
५० |
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राज्य महामार्ग कि.मी.
मध्ये |
१२२० |
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इतर जिल्हा मार्ग कि.मी.
मध्ये |
१३७८ |
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ग्राम रस्ते कि.मी.
मध्ये |
३८३४.८०० |
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नदीवरील एकूण पुलांची
संख्या |
२४४ |
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एकूण बस आगार |
२ ( गडचिरोली, अहेरी ) |
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रा. पं. महामंडळ व्दारे
एकूण जोडले गेलेले गाव |
२७१ |
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एकूण रेल्वे रस्ता
कि.मी. मध्ये |
१८.४८ |
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अस्तित्वात एकूण रेल्वे
पूल |
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एकूण निर्मनुष्य रेल्वे क्रसिंग |
२ |
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एकूण रेल्वे स्टेशन |
१ (वडसा - देसाईगंज ) |
ऐतिहासिक व धार्मिक स्थळे
गडचिरोली जिल्हा घनदाट जंगल, दऱ्याखोऱ्या आणि नैसर्गिक सौंदर्याने नटलेला आहे. येथे अनेक
निसर्गरम्य स्थळे, विलोभनिय नद्याचे संगम व ऐतिहासिक व
धार्मिक स्थळे आहेत परंतु दळणवळणाच्या सोयी अभावी घनदाट जंगल व इतर सोयी सुविधा
उपलब्ध नसल्यामुळे या जिल्हयाला पर्यटनास वाव मिळालेला नाही. मात्र या परिस्थितीत
आता लवकरच बदल होणार आहे. जिल्हयात अनेक ऐतिहासिक स्थळे आहेत त्यापैकी काही
स्थळांची थोडक्यात माहिती खालील प्रमाणे आहे.
मार्कंडेश्वर देवस्थान
गडचिरोली जिल्हयात तसेच विदर्भात
भाविकांचे श्रध्दास्थान म्हणून मार्कंडा तिर्थस्थान ओळखला जातो. जिल्हा मुख्यालय
यापासून 45 कि.मी. अंतरावर चामोर्शी तालुक्यात मार्कंडा हे देवस्थान असून ते
चामोर्शीच्या वायव्यच्या दिशेला आहे.
वैनगंगा नदीच्या उत्तर वाहिनीच्या डाव्या तिरावर वैभवशाली इतिहासाची
साक्ष देत व उत्कृष्ठ शिल्पकलेची आठवण करुन देणारे मार्कंडा देवालय आहे. प्रगट कला
संस्कृतीचे, मार्कंडेय ऋषीच्या नावाने
ओळखले जाणारे मार्कंडेश्वर मंदिर सर्वात मोठे असून मुर्तीमंत मंदिर आज दिमाखाने
उभे आहे. मंदिराच्या सभोवताल दगडावर वेरुळ, अजिंठा व खजुराहो प्रमाणे कलाकृतीचे नमुने भिंतीवर कोरलेले आढळतात.
मंदिराच्या गाभाऱ्यात महादेवाची पिंड आहे. पिंडीच्या खाली भुयारीवाट असल्याचे जुने
लोक सांगतात. या ठिकाणी वैनगंगा नदी उत्तरवाहिनी वाहत असल्यामुळे या ठिकाणाला
पुराण काळापासून भाविकांसाठी विशेष आकर्षण निर्माण झालेले आहे. हे हेमाडपंथी मंदिर
आहे.
मंदिराच्या भोवती अनेक लहान मोठया
देवळांचा समूह असून काही मंदिराचे भग्न अवशेष पाहायला मिळातात. मंदिराजवळ
ज्योतिर्लिंग असून मंदिराला लागून भुवनेश्वर, गणपती, हनुमान, महिषासूर मर्दिनी यासारखे लहान-मोठे मंदिर आहेत. मुख्य मंदिरापासून
वैनगंगा नदीच्या पात्रात उतरण्याकरीता पायऱ्या आहेत. " विदर्भाचे खजुराहो
" म्हणून ओळखले जाणारे लाखो भाविकांचे श्रध्दास्थान आणि पर्यटकांना आकर्षित
करणारे हे ऐतिहासिक तिर्थक्षेत्र आहे.
सर्वप्रथम ब्रिटीश इतिहासकार सर
कॅनिंगहॅम यांनी मार्कंडा मंदिर समुहाला भेट दिल्याचा सेंट्रल प्रॉव्हिन्सेसच्या
रिपोर्ट 1873-74 आणि 1874-75 वरुन दिसून येतो. या भेटीत त्या ठिकाणी 24 देऊळ असल्याचे नमूद केले असून या मंदिराचे बांधकाम इसवी सनाच्या
दहाव्या शतकात झाल्याचे म्हटले आहे. 24 देऊळापैकी आता चारच देऊळ सुस्थितीत
असून त्यातील 20 देऊळे पडक्या अवस्थेत आहेत त्यातील काही लुप्त झाले आहे.
1973 च्या चंद्रपूर गॅझिटिअरमध्ये मार्कंडा
मंदिर समुहाने बांधकाम राष्ट्रकुटांनी केल्याचे नमुद आहे. प्रसिध्द इतिहास संशोधक
स्व. डॉ. गिराशी यांच्या मते आठवया शतकाच्या अखेरीस होऊन गेलेला राष्ट्रकुट सम्राट
तिसरा गोविंदा यांच्या काळात मंदिराचे बांधकाम झाले असावे. विदर्भात अनेक ठिकाणी
त्याचे ताम्रपट सापडले असून त्यातील उल्लेखावरुन त्याची राजधानी
'मयुरखंडी' येथे होती. मार्कंडा किंवा मार्कंडी हे काळाच्या ओघात झालेले
मयुरखंडीचे अपभ्रम्य रुप असावे अशा या अप्रतिम कलाकृतीने नटलेल्या वास्तुशिल्पाची
दुरावस्था झाली आहे. पुरातत्व विभागाने लक्ष न दिल्यास व जनप्रतिनिधीच्या
दुर्लक्षितेमुळे मार्कंडेश्वराचे मंदिर नामशेष होऊ शकतो.
दरवर्षी महाशिवरात्रीला या ठिकाणी 15 दिवस ते पाऊण महिन्यांपर्यंत भव्य यात्रा भरते. गडचिरोली, चंद्रपूर, नागपूर व विदर्भातील लाखो भाविक
मार्कंडेश्वराच्या दर्शनासाठी येतात. जिल्हा मुख्यालयाहून भाविकांना जाण्यासाठी
गडचिरोली-चामोर्शी मार्गे मार्कंडा एस.टी. बसची सोय आहे. चंद्रपूरहून गोंडपिपरी, आष्टी, चामोर्शी मार्गे जाता येते.
मुल-हरणघाट मार्गे मार्कंडा असाही प्रवास करता येतो. या ठिकाणी पर्यटक व
भाविकांसाठी निवासस्थान, भोजन व्यवस्था आदी पर्यटनाच्या
दृष्टीने विविध सोयी उपलब्ध करण्यात आल्यास अधिक पर्यटक आकर्षित होतील. हया सोयी
करण्यास येथे भरपूर वाव आहे.
चपराळा मंदिर व अभयारण्य
जिल्हा मुख्यालयापासून 70 ते 75 कि.मी. अंतरावर मुलचेरा तालुक्यातील चपराळा हे एक भाविकांच्या
श्रध्देचे स्थान आहे. येथे कार्तिक स्वामी महाराजांचे मंदिर आहे. त्याला लागून
साईबाबा, शंकर, मारोती इत्यादीचे मंदिर व शिवलिंग
आहे. येथे नेहमीच भाविकांची गर्दी असते. महाशिवरात्रीला येथे यात्रा भरते. हनुमान
जयंतीला येथे काला व भजन किर्तनाचे कार्यक्रम आयोजित करण्यात येतात.
मंदिरापासून जवळच वर्धा-वैनगंगा नदीचा
संगम आहे. यालाच प्रशांत धाम असे म्हणतात. नदीचे पात्र विस्तीर्ण असून त्यांचे
दोन्ही काठ नैसर्गिक सौंदर्याने नटलेले आहेत. मंदिरासमोरुन आजु-बाजुला घनदाट
सागवानाची झाडे व काही चंदनाचे वृक्ष आहेत. या मंदिराच्या परिसरात जंगल असल्यामुळे
भाविकांना व पर्यटकांना वृक्ष छायेचा आश्रय घेऊन थांबण्यास अधिक मौज वाटते.
चपराळा हा अभयारण्य असून हा परिसर वन
खात्याच्या क्षेत्रात येतो. येथे वनखात्याच्या मार्फत विकास करण्यात येत असून
देखरेखीसाठी निरीक्षण कुटी तयार करण्यात आले आहे. यामुळे वन्य प्राण्याचे व वनाचे
संरक्षण करण्यास मदत झाली आहे. या अभयारण्यात वाघ, बिबटया, रानडुक्कर, निलगाय, सांबर, चित्ता, हरीण, रानमांजर, कोल्हे, ससे इत्यादी वन्यप्राणी आढळतात शिवाय अनेक जातीचे पक्षी देखील दिसून
येतात.
वनवैभव (ग्लोरी ऑफ आलापल्ली)
गडचिरोली मुख्यालयापासून 110 कि.मी. अंतरावर आणि आलापल्ली पासून केवळ 15 कि.मी. अंतरावर हे ठिकाण आहे. आलापल्लीहून भामरागडला जातांना
रस्त्याला लागून वनखात्याच्या मिरातन तलावाजवळ 'वनवैभव आलापल्ली' नावाचे सागवन झाडांनी नटलेले जंगल
आहे. सुमारे 7 हेक्टर वनक्षेत्र असून ते राखीव जंगल म्हणून घोषित केले आहे. या
ठिकाणी गगणचुंबी सागवन वृक्ष आहेत.
बिजा, येण, तिवस, बेल, तेंदू, हळद, करम, सिसम इत्यादी जातीचे वृक्ष तेथे आहेत.
हे झाडे दोनशे ते अडीचशे वर्षाचे आहेत. सर्वात जास्त गोलाईचे झाड 6 ते 7 मिटर असून लांबी (उंची) 35 ते 40 मिटर इतके आहे. या सागवानी लाकडाचा
दर्जा आशिया खंडात उच्च प्रतीचा मानला जातो. इतक्या उंचीचे सागवन वृक्ष हे
निसर्गाचे वरदान ठरले असूनही राष्ट्राची संपत्ती आहे.
येथे वनऔषधी भरपूर प्रमाणात आहे. जंगली मिरची, आवळा, वेलीयुक्त वनौषधी इत्यादी येथील जमिन
"साईल क्वालीड" ची आहे व येथे भरपूर प्रमाणात 'हमस' पोषण आहार आहे. हे ठिकाण समुद्र
सपाटीपासून 260 मिटरवर आहे. वनवैभवाने नटलेल्या या
वनश्रीला जिल्हा भेटी दरम्यान भेट देऊन निसर्गप्रेमी पर्यटक निसर्गरम्य वातावरणाचा
मनसोक्त आनंद घेतात.
लोकबिरादरी ( हेमलकसा )
भामरागड हे ठिकाण
गडचिरोली जिल्हयातील अतिदुर्गम भाग म्हणून प्रसिध्द आहे. येथे नव्याने तालुक्याची
निर्मिती झाली आहे. जिल्हा मुख्यालयापासून सुमारे 180 कि.मी. तर आलापल्लीपासून 70 कि.मी. अंतरावर भामरागड हे ठिकाण आहे. पामलगौतम, इंद्रावती व पर्लकोटा या नद्यांच्या त्रिवेणी
संगमावर भामरागड वसले आहे. घनदाट जंगल व दऱ्याखोऱ्यांनी व्याप्त परिसर असून सृष्टी
सौंदर्याने ते नटलेले आहे. त्रिवेणी संगमावर सुर्योदय व सुर्यास्त पाहण्याचा वेगळा
आनंद येथे उपभोगायला मिळते.
पर्लकोटा व पामलगौतम नद्यांच्या काठावर दोन
विश्रामगृह असून एक वनखात्याचे तर दुसरे सार्वजनिक बांधकाम विभागाचे आहे.
पर्यटनसाठी आलेल्यांना राहण्यासाठी उत्तम सोयींनी युक्त असे हे विश्रामगृह आहे.
येथून भामरागडच्या नैसर्गिक सौंदर्यांचा आनंद देखील लुटता येतो.
हेमलकसा येथे लोकबिरादरी
नावाचे प्रकल्प असून भामरागडपासून 3 कि.मी. अंतरावर आहे. मेगॅसेस पुरस्कार प्राप्त
बाबा आमटे यांचे चिरंजीव डॉ. प्रकाश आमटे यांचा प्रकल्प असणारा लोकबिरादरीचा
रोग्यांचा दवाखाना आहे. बाबाचे चिरंजीव डॉ. प्रकाश आमटे आणि सौ. डॉ. मंदाताई आमटे
हे दाम्पत्य लोकसेवेचे व्रत घेऊन येथे आदिवासी बांधवाची आरोग्य सेवा करीत आहेत.
सर्व आरोग्य सोयींनी सुसज्ज दवाखाना आहे. येोि शस्त्रक्रिया, गंभीर रोगावर उपचार केला जातो. दवाखान्याला
लागूनच आदिवासी मुलांसाठी इयत्ता 10 वी पर्यंत शिक्षणाची सोय आहे तसेच राहण्याची व
जेवणाची मोफत व्यवस्था आहे.
आदिवासी
माडियांच्या मुलांना शिक्षणाबरोबर शेती, शिक्षण, हस्तकला, बांबूपासून व लाकडापासून वस्तू बनविण्याचे व
स्वावलंबनाचे शिक्षण दिले जाते. त्या परिसरातील जंगलात असलेल्या हिस्त्र
प्राण्यांची माहिती आदिवासींना व्हावी. त्यांच्यात प्राण्याबद्यल आपुलीकीची भावना
निर्माण करण्याच्या हेतुने प्राणी संग्रहालय आहे. येथे वाघ, बिबटया, अस्वली, तरस, रानडुक्कर, हरीण, माकड, विषारी नाग, मन्यार तसेच अजगर, सुसरी व पक्षी पाहण्यास वेगळा आनंद मिळतो.
या निसर्गाने
नटलेल्या परिसरात माडिया जमात मोठया आनंदाने व गुण्यागोविंदाने राहत आहे. याची
परंपरा वैशिष्टयपूर्ण असून कला व संस्कृती आजपर्यंत त्यांनी जपून ठेवली आहे.
त्यांची लोकगीते व नृत्य अध्ययनाचा विषय बनलेले आहे. सणासुदीला, लग्नप्रसंगी व आनंदाच्या वेळी त्यांच्यातील
पारंपारीक 'रेला नृत्य' आणि 'ढोल' याला विशेष आकर्षण निर्माण झाले आहे.