२८. संबंधबोधक अव्यय ,समुच्चयबोधक अव्यय - Scholarship Exam

 

उपघटक - संबंधबोधक अव्यय 

   जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ आकर उनका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों के साथ बताते हैं, उन्हें संबंधबोधक या संबंध सूचक अव्यय कहते हैं। जैसे- के कारण, के बिना, की तरफ, की ओर, के सामने, के निकट, के द्वारा, के लिए, के अदर, के पास, के पश्चात, के बाद, के भीतर, के अलावा, के अतिरिक्त, के बीच, के मध्य, के पीछे, के नीचे, के ऊपर, के आगे, तुम्हारे साथ, के समान, के बराबर, के तुल्य, के विरुद्ध, के खिलाफ, के अनुसार, के अनुरूप, के वास्ते आदि।

उदाहरण : बच्चा मेरी तरफ आ रहा है।

संबंधबोधक और क्रियाविशेषण अव्यय में अंतर :

  कुछ स्थानवाचक और कालवाचक अव्यय संबंधबोधक भी होते हैं और क्रिया विशेषण भी। जब इनका प्रयोग किसी संज्ञा या सर्वनाम के साथ संबंध बताने के लिए होता है, तब ये संबंधबोधक कहलाते हैं और जब किसी क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं तब क्रिया विशेषण कहलाते हैं। जैसे

    

संबंधबोधक          क्रियाविशेषण

तुम घर के अंदर आओ। 

वे तुम्हारे पीछे बैठे हैं। 

किताब आलमारी के नीचे पड़ी है। 

     तुम अंदर आओ।

     वे पीछे बैठे हैं।

     किताब नीचे पड़ी है।

उपघटक - समुच्चयबोधक अव्यय

जो शब्द दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- राकेश और सुरेखा बाजार जाएँगे। तथा, और, व, या, अथवा, किंतु, परंतु, लेकिन, अतएव, अतः, इसलिए, क्योंकि, कि, ताकि, बल्कि, पर, एवं, यदि-तो, वरना आदि समुच्चयबोधक अव्यय हैं।