15. वृत्त, वत्त का क्षेत्रफल, वृत्तखंड, वृत्तचाप एवं वृत्त के गुणधर्म - Scholarship Exam

 उपघटक - 3.3 

वृत्त, वत्त का क्षेत्रफल, वृत्तखंड, वृत्तचाप एवं वृत्त के गुणधर्म

♦ वृत्त : प्रतल में किसी स्थिर बिंदु से समान दूरी पर स्थित बिंदुओं के समूह को वृत्त कहते हैं।

♦ त्रिज्या और व्यास :

(1) एक ही वृत्त की सभी त्रिज्याएँ समान लंबाई की होती हैं।

2) एक ही वृत्त में असंख्य त्रिज्याएँ होती हैं। (त्रिज्या = r)

3) वृत्त में समान लंबाई वाले असंख्य व्यास होते हैं। (व्यास = d)

4) एक ही वृत्त के व्यास की लंबाई उस वृत्त की त्रिज्या की लंबाई का दुगुना होती है। (d = 2r)

वृत्त की जीवा :

1) वृत्त पर स्थित किसी भी दो बिंदुओं को जोड़नेवाली रेखा को उस वृत्त की जीवा कहते हैं।

2) वृत्त की जीवा केंद्रबिंदु से होकर जाती हो तो उसे वृत्त का व्यास कहते हैं।

3) व्यास वृत्त की सबसे बड़ी जीवा होती है।

4) एक वृत्त की असंख्य जीवाएँ होती हैं।

रेख OR, रेख OP, रेख OQ-वृत्त की त्रिज्याएँ

रेख AB, रेख CD, रेख PQ-वृत्त की जीवाएँ

रेख PQ-वृत्त का व्यास। बिंदु 0 - वृत्त का केंद्र

दो वृत्त की त्रिज्याएँ समान हों तो उनको सर्वांगसम वृत्त कहते हैं। प्रत्येक वृत्त

स्वयं से सर्वांगसम होता है। सर्वांगसम वृत्त : r1 = r2

वृत्त का क्षेत्रफल : प्रतल में खींचे गए वृत्त के कारण प्रतल के 3 भाग होते हैं।

1) वृत्त अंत:भाग 2) वृत्त का बाह्यभाग 3) प्रत्यक्ष वृत्त

वृत्त का अंत:भाग एवं वृत्त का कोर मिलकर वृत्त का क्षेत्र बनता है।

वृत्त के अंत:भाग के बिंदु : बिंदु A, बिंदु B, बिंदु C.

वृत्त के बाह्यभाग के बिंदु : बिंदु H, बिंदु G.

वृत्त के पर स्थित बिंदु : बिंदु E, बिंदु D, बिंदु F.

वृत्तखंड :

वृत्त में खींची गयी जीवा से वृत्त के दो भाग होते हैं। प्रत्येक भाग को वृत्तखंड कहते हैं।

केंद्र की तरफ के भाग को दीर्घ वृत्तखंड और उसके विपरित भाग को लघु वृत्तखंड कहते हैं।

वृत्तखंड AXB यह लघुवृत्तखंड है। और वृत्तखंड AYB यह दीर्घवृत्तखंड है।

आकृति में छायांकित किया गया वृत्तखंड AXB यह लघवृत्तखंड है।

अर्धवृत्तखंड :

वृत्त की व्यास के कारण वत्त के दो समान भाग होते हैं। प्रत्येक भाग को अर्धवृत्तखंड कहते हैं।

आकृति में AB इस व्यास की वजह से AXB और AYB यह दो अर्धवृत्तखंड हैं।

एक ही वृत्तखंड के कोण :

∠APB एवं  ∠AQB यह कोण एक ही वृत्तखंड में है।

m∠ZAPB = m∠AQB

एक ही वृत्तखंड के कोण सर्वांगसम होते हैं।

अर्धवृत्त के कोण :

अर्धवृत्तखंड का कोण समकोण होता है।

m∠APB = m∠AQB = 90°

न्यून व दीर्घ वृत्तखंड का कोण

दीर्घवृत्तखंड का कोण न्यूनकोण होता है।

लघुवृत्तखंड का कोण अधिककोण होता है।

वृत्तकेंद्र एवं जीवा की दूरी

वृत्तकेंद्र से जीवा पर डाला गया लंब वृत्तकेंद्र एवं जीवा की दूरी है। 

1) केंद्र से जीवा पर डाले गए लंब का गुणधर्म

रेख PQ ⊥ जीवा AB.

l(AQ) = l(BQ)

वृत्तकेंद्र से जीवा पर डाला गया लंब उस जीवा को समद्विभाजित करता है।

2) सर्वांगसम जीवा और केंद्र के बीच की दूरी का गुणधर्म

जीवा AB ≅ जीवा CD.

OP ⊥ AB,  OQ ⊥ CD

l(OP) = l(OQ)

एक ही अथवा सर्वांगसम वृत्त में सर्वांगसम जीवा केंद्र से समान दूरी पर होती हैं।

3) सर्वांगसम जीवा द्वारा वृत्तकेंद्र से निर्मित कोणों का गुणधर्म

जीवा AB ≅ जीवा CD

∠AOB ≅∠COD

एक अथवा सर्वांगसम वृत्त में सर्वांगसम जीवा वृत्तकेंद्र से सर्वांगसम कोण बनाती हैं।

∠x=∠y

वृत्त की परिधि तथा क्षेत्रफल

वृत्त की परिधि :

वृत्त की कोर की प्रत्यक्ष लंबाई

परीधि वृत्त की परिधि होती है।

परिधि तथा व्यास का संबंध

किसी भी वृत्त की परिधि तथा उसके व्यास का अनुपात एक अचर संख्या होती है। यह एक अपरिमेय संख्या होती है इस संख्या को यूनानी अक्षर π (पाई) द्वारा दर्शाते हैं।

(π = 22⁄7 या 3.14, सरलता के लिए यह मान लिया जाता है।)

परिधि ⁄ व्यास = 22

त्रिज्या - r , व्यास - d,  परिधि - c

  1. c ⁄ d = π
  2. c=πd,
  3.  d= c⁄π=
  4.  r= c⁄2π,
  5.  r=d⁄2

वृत्त का क्षेत्रफल 

वृत्त की परिधि द्वारा निर्मित सीमित क्षेत्र को वृत्त का क्षेत्रफल कहते हैं।

r वृत्त की त्रिज्या हो, तो वृत्त का क्षेत्रफल = rπ²

वृत्त का चाप

अंत:खंडित चाप

आकृति में ∠AOB व ∠PQR द्वारा

चाप AXB एवं चाप PYR

क्रमश: अंत:खंडित किये गए हैं।

लघुचाप तथा दीर्घ चाप

आकृति 1 में चाप PXQ एवं चाप PYQ यह क्रमशः दीर्घ चाप एवं लघुचाप हैं।

आकृती 2 में चाप AXB एवं चाप AYB यह अर्धवृत्तीय चाप हैं।

केंद्रीय कोण     

यदि कोण का शीर्षबिंदु वृत्त का केंद्र हो,

तो उस कोण को केंद्रीय कोण कहते हैं।

आकृति में ∠POQ यह केंद्रीय कोण है।

चाप का माप

1) लघुचाप का माप:

लघुचाप के संगत केंद्रीय कोण के माप को उस लघुचाप का माप कहते हैं।

 m∠AOB = m (चाप AXB)

2) दीर्घचाप का माप :

दीर्घचाप का माप = 360° – संगत लघुचाप का माप।

3) अर्धवृत्तीय चाप का माप :

अर्धवृत्तीय चाप का माप 180° होता है।

अंतर्लिखित कोण

कोण ABC का शीर्षबिंदु यह चाप ABC पर हो और चाप ABC के अंतबिंदु ZABC की भुजाओं पर हो, तो ∠ABC का चाप ABC में अंतर्लिखित कोण कहते हैं।

अंतर्लिखित कोण व अंत:खंडित चाप के मापों का संबंध 

वृत्त के किसी चाप में अंतर्लिखित कोण का माप उस कोण द्वारा अंत:खंडित चाप के माप का आधा होता है।

अंतर्लिखित कोण का माप =  अंत:खंडित चाप का माप ⁄ 2

m ∠ABC = m (चाप AXC) ⁄ 2

चक्रीय चतुर्भुज

जिस चतुर्भुज के चारों शीर्षबिंदु एक ही वृत्त पर हों,

उस चतुर्भुज को चक्रीय चतुर्भुज कहते हैं।

आकृति में ■ABCD यह चक्रीय चतुर्भुज है।

चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोण संपूरक होते हैं

 m∠DAB + m∠BCD= 180°

m∠ADC + m∠ABC = 180°