1. प्राकृत संख्याएँ, पर्ण संख्याएँ, पूर्णांक संख्याएँ, परिमेय संख्याएँ ।अपरिमेय संख्याएँ तथा वास्तविक संख्याएँ - Scholarship Exam

 

घटक 1 : संख्याज्ञान

उपघटक - 1.1 : प्राकृत संख्याएँ, पर्ण संख्याएँ, पूर्णांक संख्याएँ, परिमेय संख्याएँ ।अपरिमेय संख्याएँ तथा वास्तविक संख्याएँ

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⊕ प्राकृत संख्याएँ : 1, 2, 3, 4, 5, ........... इस समूह की संख्याओं को गणन संख्याएँ तथा  प्राकृत संख्याएँ कहते है।

⊕  पूर्ण संख्याएँ : 0, 1, 2, 3, 4, 5, ........... इस समूह की संख्याओं को पूर्ण संख्याएँ कहते हैं।

⊕ पूर्णांक संख्याएँ : ...........,-4,-3,-2, -1, 0, 1, 2, 3, 4,........... इस समूह की संख्याओं को पूर्णांक संख्याएँ कहते हैं।

⊕ परिमेय संख्याएँ : यदि a कोई पूर्णांक संख्या और b कोई शून्येतर पूर्णांक संख्या हो तो  a b  यह परिमेय संख्या है। 

⊕ अपरिमेय संख्या : जिन संख्याओं का दशमलव स्वरूप असांत होता है, परंतु आवर्ती नहीं होता, उन संख्याओं को अपरिमेय संख्या कहते है।

जैसे, √2 = 1.41421356 ....... 

अपूर्ण वर्ग संख्याओं के वर्गमूल अपरिमेय संख्या होते हैं।

⊕ वास्तविक संख्याएँ : सभी परिमेय और अपरिमेय संख्याओं को मिलाने पर संख्याओं का जो समूह निर्मित होता है, उसे वास्तविक संख्याओं का समूह कहते है। इस समूह की प्रत्येक संख्या को वास्तविक संख्या कहते है। इस स्पष्टीकरण के आधार पर ध्यान दें कि

* प्रत्येक परिमेय संख्या, वास्तविक संख्या होती है।

* प्रत्येक अपरिमेय संख्या भी वास्तविक संख्या होती है।

ध्यान दें

⇒ यह सबसे छोटी प्राकृत संख्या है। सबसे बड़ी प्राकृत संख्या बताई नहीं जा सकती।

⇒ 0 यह सबसे छोटी पूर्ण संख्या है। सबसे बड़ी पूर्ण संख्या बताई नहीं जा सकती। 

⇒ 0 यह न तो धनात्मक और न ही ऋणात्मक संख्या है।

⇒ -1 यह सबसे छोटी ऋणात्मक पूर्णांक संख्या है। सबसे छोटी ऋणात्मक पूर्णांक संख्या बताई नहीं जा सकती।